एक समय था जब महिलाओं को वोट
करने से वंचित रखा गया था,आज वही महिलाएं सत्ता पलटने की हैसियत रखती हैं। बड़े मसक्कत के बाद वोट के
अधिकार प्राप्त हुए महिलाओं को तो आज वे जम कर उसे भुना भी रही हैं । महिलाएघरो
में रहने वाली गूंगी गुड़िया से आगे निकल कर
सियासदानों की पहली पसंद बन गई है।
वर्षो से समाज के पिछले पायदान में दबी - छुपी महिलाओ की शक्ति को राजनीतिक
पंडितो ने पहचान कर सत्ता की सीढ़ी बना ली है।
आधी आबादी की शक्ति को राजनीतिक दल पिछले कुछ वर्षो से सीधा धन लाभ देकर
अपनी ओर खिंच रहे है। झारखंड की
"मइया सम्मान योजना" इस कड़ी में कोई नई पहल नहीं बल्कि इतिहास में महिलाओं
को डायरेक्ट कैशबेनिफिट दिए जाने की कड़ी में जांची - परखी योजना है।
2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड में मइया सम्मान योजना ने कई
कारनामे किये।
I.
JMM 34 सीटों अब तक अपने इतिहास में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में
उभरी।
II.
12 महिला विधायकों की जीत के साथ सर्वाधिक महिला विधायकों की जीत झारखंड में
हुई।
III.
इन
उपलब्धियों के पीछे महिलाओ की चुनाव में बढ़ती भागीदारी रही है।
v 2024 के विधानसभा चुनाव में राज्य में कुल 1 करोड़ 76 लाख 81 हजार सात (1,76,81,007) लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इनमें महिला मतदाताओं
की संख्या पुरुषों की तुलना में 5 लाख 51 हजार 797 (5,51,797) ज्यादा रही।
महिलाओं को कैश देने की योजना
लगभग हर पार्टी प्रयोग कर रही है।
बजट भार
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया'
की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अलग-अलग राज्यों में
महिलाओं को 'डायरेक्ट
कैश ट्रांसफर' के
जरिये दी जाने वाले धनराशि कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गई है।
1. 'लाडकीबहिण' योजना के ज़रिये पैसा देने के लिए महाराष्ट्र ने सबसे ज़्यादा
46,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
2. दूसरे नंबर पर कर्नाटक है, जिसने 'गृह-लक्ष्मी' योजना के तहत महिलाओं को सालाना 28,608 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है।
3. मध्य प्रदेश ने 'लाड़ली बहन' योजना के तहत 18,984 करोड़ रुपये,
4. पश्चिम बंगाल ने 'लक्ष्मीर भंडार' योजना के तहत 14,400 करोड़ रुपये,
5. गुजरात ने 'नमो श्री योजना' के तहत 12,000 करोड़ रुपये, ,
6. ओडिशा ने 'सुभद्रा योजना' के तहत 10,000 करोड़ रुपये
7. झारखंड के बजट के सन्दर्भ में देखे तो ,
2024 -25 का कुल बजट₹1,28,900 करोड़ रूपये रहा। अगर मइया सम्मान को देखे तो इस बजट का
करीब 13
-14 प्रतिशत होगा।
झारखंड में मइया सम्मान योजना के
तहत 18
-50 वर्ष की महिलाओ को 2500
रूपये भेजे जा रहे है।
रांची-झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छह फरवरी 2025
को मंईयां सम्मान योजना की 56,61,791 महिलाओं के बीच 1415.44 करोड़ की राशि ट्रांसफर की। अगर साल भर की देनदारी इसी आकंड़े पर रही तो ,
16985 करोड़ रूपये लगभग होगी। अगर
झारखंड के बजट के सन्दर्भ में देखे तो , 2024 -25 का कुल बजट₹1,28,900 करोड़ रूपये रहा। अगर मइया सम्मान को देखे तो इस बजट का करीब
13
-14 प्रतिशत होगा। इतनी बड़ी राशि
खर्च करना झारखंड जैसे राज्य के लिए कितना उपयोगी होगा।
महिलाओ की बढ़ती भागीदारी की ताकत
-
भारत
के चुनाव आयोग के मुताबिक़, देश में हुए पहले चुनाव में महिलाओं की भागीदारी 7.8 करोड़ यानी 45 फ़ीसदी थी.
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भारत
के चुनाव आयोग के मुताबिक़, देश में हुए पहले चुनाव में महिलाओं की भागीदारी 7.8 करोड़ यानी 45 फ़ीसदी थी.
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भारत
में 1971 के चुनाव के बाद से महिला मतदाताओं की तादाद में 235.72 फ़ीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है
-
साल
2024 में 65.78 फ़ीसदी महिला मतदाताओं ने मतदान किया,
जबकि पुरुष मतदाताओं ने 65.55 फ़ीसदी मतदान किया.
-
चुनाव
आयोग का कहना है कि साल 2019 की तरह, 2024 में भी महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से अधिक रही और
लोकसभा चुनावों के इतिहास में ये केवल दूसरी बार हुआ है.
विपक्षी पार्टिया और अर्थशास्त्रियों द्वारा
मुफ्त की योजनाओ पर प्रश्न चिन्ह उठाये जाते रहे है मगर इसके लाभ से भी इंकार नहीं
किया जा सकता है। सिद्ध बात है कि एक महिला के उत्थान के लिए पहले उसे आर्थिक
आज़ादी चाहिए और भारतीय परिवेश आज भी दकियानुषी परंपराओं ,अन्धविश्वशों में जकड़ी हुई हैं जिसके कारण अधिकांश महिलाएं
मेहनती होते हुए बेरोजगार हैं। महिलाएं साधारणतया पतियों / भाइयों / पिताओं के आय
पर निर्भर रहती हैं। घरेलुकामो में व्यस्त
होने के बावजूद उनकी कोई आर्थिक स्वतन्त्रता नहीं है।
योजना की ताकत
- वृहद कवरेज: 56-58 लाख महिलाओं को
लाभ,
जो भारत में किसी भी राज्य की समान योजनाओं में सबसे
अधिक है।
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): राशि सीधे बैंक खातों में जाती है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
- आर्थिक राहत: गरीब महिलाओं को तत्काल
राहत प्रदान करती है,
जिससे उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं।
- लचीलापन: आयु सीमा में संशोधन और
राशि बढ़ाने जैसे कदमों से योजना को अधिक समावेशी बनाया गया है
आलोचनाएं
1.
विपक्ष का दावा है
कि योजना का उपयोग वोट बैंक के लिए हो रहा है
2.
बजट का दबाव: स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों की तुलना में योजना पर अत्यधिक बजट आवंटन
की आलोचना हो रही है।
3.
प्रशासनिक समस्याएं: आधार लिंकिंग, सत्यापन में देरी, और लाभार्थी
सूची से नाम हटाने जैसे मुद्दों ने असंतोष पैदा किया है।
4.
दीर्घकालिक प्रभाव
का अभाव: योजना केवल नकद हस्तांतरण पर केंद्रित है, जिससे दीर्घकालिक सशक्तिकरण (जैसे रोजगार सृजन, कौशल विकास) सीमित है
5.
लाभार्थी सूची में
छंटनी
लाभ
1. अवसरों की कमी का आर्थिक मुआवजा - महिलाओं
को ये कैश ट्रांसफ़र बाज़ार में अवसरों की कमी के लिए एक तरह का आर्थिक मुआवजा
देने के रूप में देखा जा सकता है
2. पलायन पर रोक
3. आर्थिक स्वतन्त्रता - के
अनुदान ने उन्हें आर्थिक स्वतन्त्रता
दिलाई है। महिलायें अपनी इच्छा अनुसार इस
पैसे को खर्च कर सकती हैं।
4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गति - झारखंड
के ग्रामीण क्षेत्र में यह छोटी सी राशि भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती
है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्र में खर्च को
बड़ा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गति ला सकती है।
5. ग्रामीण उद्योग - व्यापार को बढ़ावा दे सकती है।
6. सामाजिक विकास को बढ़ावा - महिलाये
साधारणतया खर्च के मामले में काफी होशियार होती है। इनका ये पैसा महिलाओ द्वारा अपने और बच्चो के
पोषण और शिक्षा में खर्च होने से सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
7. साधारणतया पुरुषो के द्वारा प्राप्त आय के खर्च का बहुत
थोड़ा हिस्सा महिलाओ के स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च होता है। एनीमिया जैसे बीमारी झारखंड में पोषण की कमी के
कारण ही है।
8. पिछले एक महान योजना" मनरेगा" का परिणाम देखा जा
चुका है कि ग्रामीण मुद्रा की तरलता में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोतरी हुई
है यानि महिलाओं के हाथ में मुद्रा जाने से उत्पादन के साथ अन्य गतिविधियां भी
विकसित होंगी।
9. राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि
10.लिंग असमानता में कमी
11.महिलाओं के सामाजिक प्रभाव में वृद्धि
12.शिक्षा और रोजगार: योजना ने कुछ स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाई शुरू
करने में मदद की है और कुछ को कॉलेज में प्रवेश लेने का अवसर प्रदान किया है, विशेष रूप से आदिवासी और पिछड़े समुदायों में
13.सामाजिक समानता: योजना का लाभ सभी वर्गों की महिलाओं (SC,
ST, OBC, और सामान्य) को मिल रहा है, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिला है।
14.महिला कल्याण में असरदार
हानि
1. बजट पर भार
2. युवा पीढ़ी को आश्रित बनाना
3. पुरुषो दवरा दुरूपयोग की संभावना
4. अन्य योजनाओ के लिए बजट की कमी
5. सरकार विकास के कामो से उदास हो सकती है
6. रोजगार / नौकरी के अवसरों पर कम ध्यान
7. लालच देकर वोट हासिल करना वोट ख़रीदने जैसा है
8. श्रम की लागत में वृद्धि - महंगाई बढ़ा सकती है
9. श्रम मिलने में कमी
10.महिलाओं पर अत्याचार में वृद्धि हो सकती है
सुझाव
1. वित्तीय अनुशासन - लाभों की
प्राप्ति के लिए आवश्यक है सरकार कर्ज में
न डूबे। इतनी बड़ी राशि के हर वर्ष प्राप्त
करने के लिए सरकार को आय के स्रोतों पर ध्यान देना होगा।
2. अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार एवं लाभों में
वृद्धि करना -बुजुर्गो, विधवाओं और विकलांगो के सार्वजनिक पेंशन को भी बढ़ाकर 2500रूपये करने की आवश्यकता है क्योकि अपनी अशक्तता में उनको
पैसे की सर्वाधिक जरूरत है
3. रोजगार एवं
अवसंरचना निर्माण पर अधिक बल देना - उससे भी बड़ी जरूरी बेरोजगार युवा संसाधन पर सरकार का ध्यान आकृष्ट
होना अति आवश्यक है।
4. महिलाओं के लाभ की योजनाओं एवं कानूनों को मजबूत करना
मुख्यमंत्री
मइया सम्मान योजना ने झारखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण
योगदान दिया है,
खासकर ग्रामीण और वंचित समुदायों में। इसकी वृहद कवरेज, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, और बढ़ी हुई राशि इसे भारत की सबसे उदार योजनाओं में से एक बनाती है। हालांकि, प्रशासनिक चुनौतियां, दीर्घकालिक
प्रभाव का अभाव,
और बजट के दबाव जैसे मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता
है। यदि इसे शिक्षा,
कौशल विकास, और रोजगार
सृजन के साथ जोड़ा जाए,
तो यह योजना न केवल तात्कालिक राहत प्रदान करेगी, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन भी लाएगी।
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RAJESH KUMAR
साक्षात्कार(UPSC, JPSC and BPSC )
सरकारी एवं गैर सरकारी पदों में कार्य करने का अनुभव
RANEE KUMARI
( BPSC उत्तीर्ण, BIHAR PANCHAYATI RAJ DEPARTMENT)
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