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JPSC ACF/ FRO NOTES झारखंड में पेसा कानून क्यों आवश्यक है ? इसको लागु करने में झारखंड में क्या चुनौतियां आ रही है , समीक्षा कीजिये।

 

FRO/ACF EXAM 2025

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JPSC FRO EXAM 2025

पेपर-II: सामान्य ज्ञान

  • कुल अंक : 100:
    1. समसामयिक घटनाएँ : राज्य (झारखंड), राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाएँ और व्यक्तित्व, जिनमें खेल आयोजन और व्यक्तित्व शामिल हैं।
    2. भारत का इतिहास : प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, इसके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलू, 19वीं शताब्दी का पुनरुत्थान, राष्ट्रवाद का विकास और स्वतंत्रता की प्राप्ति शामिल है।
    3. भूगोल : पृथ्वी का आकार, माप, अक्षांश, देशांतर, महासागरीय धाराएं, ज्वार-भाटा, वायुमंडल और इसकी संरचना; भारत का भौतिक, सामाजिक और आर्थिक भूगोल; जलवायु, वनस्पति, प्राकृतिक संसाधन; तथा झारखंड के विशेष संदर्भ में कृषि और औद्योगिक गतिविधियां।
    4. भारतीय राजव्यवस्था : भारत की राजनीतिक प्रणाली और संविधान, जिसमें इसकी रूपरेखा, मुख्य विशेषताएं, सरकारी अंग और केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर उनकी कार्यप्रणाली (पंचायती राज संस्थाओं सहित), मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत तथा भारतीय लोकतंत्र और चुनावों की कार्यप्रणाली शामिल है।
    5. भारतीय अर्थव्यवस्था : आर्थिक विकास, अर्थव्यवस्था की नींव, भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं और क्षेत्र, योजना प्रक्रिया, पंचवर्षीय योजनाएं, बाजार, राज्य नियंत्रण, उदारीकरण, वैश्वीकरण, मुद्रास्फीति, गरीबी और बेरोजगारी।
    6. झारखंड का इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति
    7. सामान्य विज्ञान और पर्यावरण संबंधी मुद्दे : विज्ञान और पर्यावरण संबंधी मामलों की सामान्य समझ, जिसमें रोजमर्रा के अवलोकन, अनुभव और वर्तमान पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं।

 

 

 

 

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The Uवा Dhumkudiya Team

RANEE RAJ

(अंकेक्षण अधिकारी)

 

RAJESH KUMAR

साक्षात्कार(UPSC, JPSC and BPSC )

सरकारी एवं गैर सरकारी पदों में कार्यानुभव

 

 

INDEX

समसामयिक घटनाएँ

1.  झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 पर चर्चा करें।

2.  सरना धर्म क्या है ? इसके धर्म कोड की मांग के कारण एवं चुनौतियों पर चर्चा करें।

3.  पारसनाथ के संबंध में जैन एवं संथालों के विवाद का विश्लेषण कीजिये।

4.  झारखंड में लागु मइया सम्मान योजना  का विश्लेषण कीजिये।  राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिये।

5.  झारखंड में भाषाई मुद्दे की विवेचना कीजिए।  झारखंड में भाषाओ के संरक्षण और विकास के लिए उपाय बताइये। 

6.  झारखंड के संदर्भ में केंद्र राज्य संबंध का विश्लेषण कीजिए।

31. 2025 में भारत और विश्व के प्रमुख खेल आयोजन और उपलब्धियां

3131  Questions   

भारत का इतिहास

1.  सिंधु घाटी सभ्यता के उद्भव के पीछे मुख्य कारक क्या हैं? सिंधु सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।'

2.  

22. भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में क्रांतिकारी आंदोलनों की भूमिका का परीक्षण करें।

23. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका का मूल्यांकन करें।

123  Questions

भूगोल

1.  पृथ्वी की आंतरिक संरचना का वर्गीकरण करें एवं इसकी प्रमुख विशेषताएं बताइये।

2. 

24. युवा जनसंख्या एक परिसंपत्ति और दायित्व दोनों हो सकती है।इस कथन के प्रकाश में, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को साकार करने में बेरोजगारी और अल्परोजगार की चुनौतियों का परीक्षण करें।

24  Questions

भारतीय राजव्यवस्था

1.  

21. भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा और इसकी व्याख्या पर चर्चा करें। साथ ही अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए प्रावधानों पर चर्चा करें।

भारतीय अर्थव्यवस्था

1.  1991 के बाद से नियोजित अर्थव्यवस्था से बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था में बदलाव ने भारत के आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित किया है?

2.  

झारखंड का इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति

1.  झारखंड में आदिवासी आंदोलन में बिरसा मुंडा के योगदान पर चर्चा करें। उनके उलगुलान ने आदिवासी समुदायों की सामाजिक-राजनीतिक चेतना को कैसे प्रभावित किया?

2.  

14. झारखंड की आदिवासी संस्कृति पर वैश्वीकरण के प्रभाव का विश्लेषण करें। स्वदेशी भाषाओं और परंपराओं की रक्षा के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

सामान्य विज्ञान और पर्यावरण संबंधी मुद्दे

1.  ऑप्टिकल फाइबर की कार्यप्रणाली के सिद्धांत और भारत में आधुनिक दूरसंचार में उनके महत्व की व्याख्या करें।

2.  

16. नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत क्या हैं? भारत की स्तिथि नवीकरणीय ऊर्जा में क्या है ?पेरिस समझौते के तहत नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की प्रगति पर चर्चा करें।

17

27. शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने में हरित हाइड्रोजन की भूमिका का विश्लेषण करें। भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह से तैयार है?

 130 + Questions

1.     झारखंड में  पेसा कानून क्यों आवश्यक है ? इसको लागु करने में झारखंड में क्या चुनौतियां आ रही है , समीक्षा कीजिये।

पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा कानून) भारत में अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को स्वशासन और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके पारंपरिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह कानून आदिवासी समुदायों को उनकी संस्कृति, परंपराओं और संसाधनों के प्रबंधन में सशक्त बनाने का प्रयास करता है। झारखंड, जो एक आदिवासी बहुल राज्य है, में पेसा कानून का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि यह राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना में गहराई से जुड़ा हुआ है। यह लेख पेसा कानून की अवधारणा, झारखंड में इसकी स्थिति, इसकी आवश्यकता और इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करता है।

पेसा कानून क्या है?

पेसा कानून, जिसे औपचारिक रूप से पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 कहा जाता है, भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने के लिए 24 दिसंबर, 1996 को पारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों को ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन प्रदान करना, उनकी परंपरागत शासन व्यवस्था को मान्यता देना, और जल, जंगल, जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

पेसा कानून के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • ग्राम सभा की सर्वोच्चता: ग्राम सभाओं को अनुसूचित क्षेत्रों में विकास योजनाओं, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और सामाजिक-आर्थिक निर्णयों में महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
  • प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार: ग्राम सभाओं को लघु खनिज, वन उपज और अन्य सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है।
  • परंपरागत शासन व्यवस्था: पारंपरिक नेताओं जैसे मानकी-मुंडा, पाहन, और प्रधान को ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता करने का अधिकार।
  • लैंगिक समानता: ग्राम सभा में कम से कम 50% महिलाओं और 40% अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • दंड का प्रावधान: ग्राम सभा को सामाजिक और धार्मिक नियमों के उल्लंघन पर 10 रुपये से 1000 रुपये तक का दंड लगाने का अधिकार।

झारखंड में पेसा कानून की स्थिति

झारखंड में पेसा कानून को लागू करने की प्रक्रिया कई वर्षों से लंबित है, हालांकि इसे लागू करने के लिए बार-बार प्रयास किए गए हैं। झारखंड हाई कोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को राज्य सरकार को दो महीने के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था, लेकिन यह समयसीमा समाप्त होने के बावजूद नियमावली लागू नहीं हो सकी है।

  • ड्राफ्ट और परामर्श: झारखंड सरकार ने 2022 में पेसा नियमावली का एक मसौदा तैयार किया और इसे सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। इस मसौदे पर 262 सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनमें से 142 को स्वीकार कर संशोधन किया गया।
  • कैबिनेट स्वीकृति की प्रतीक्षा: नियमावली को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
  • हाई कोर्ट की सख्ती: हाई कोर्ट ने सरकार के उदासीन रवैये पर नाराजगी जताई और दो महीने में नियमावली लागू करने का अल्टीमेटम दिया।
  • आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की सक्रियता: आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने पेसा कानून के पूर्ण प्रावधानों (पी-पेसा) को लागू करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है।

झारखंड में पेसा कानून की आवश्यकता

झारखंड में पेसा कानून की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. आदिवासी स्वशासन को सशक्त करना: झारखंड में 26% से अधिक आबादी आदिवासी है, और पेसा कानून ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर उनकी परंपरागत शासन व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। यह आदिवासियों को उनकी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार शासन चलाने का अवसर देता है।
  2. प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा: झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन अक्सर खनन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण आदिवासियों की जमीन और संसाधनों का शोषण होता है। पेसा कानून ग्राम सभाओं को खनन और भूमि अधिग्रहण पर सहमति देने का अधिकार देता है, जिससे आदिवासियों के हितों की रक्षा होती है।
  3. सामाजिक और आर्थिक विकास: पेसा कानून ग्राम सभाओं को विकास योजनाओं को मंजूरी देने और सामुदायिक संसाधनों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है।
  4. सांस्कृतिक संरक्षण: यह कानून आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक त्योहारों और सामाजिक प्रथाओं की रक्षा करता है।
  5. लैंगिक समानता: पेसा कानून ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे लैंगिक समानता को प्रोत्साहन मिलता है।

पेसा कानून लागू करने में चुनौतियां

झारखंड में पेसा कानून को लागू करने में निम्नलिखित चुनौतियां सामने आ रही हैं:

  1. कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं: झारखंड में पंचायती राज अधिनियम, 2001 को लागू किया गया, जो पेसा कानून के प्रावधानों के साथ पूरी तरह से संगत नहीं है। कुछ आदिवासी संगठन इसे असंवैधानिक मानते हैं और पेसा के पूर्ण प्रावधानों (पी-पेसा) की मांग करते हैं।
  2. राजनीतिक उदासीनता: पिछले 24 वर्षों से झारखंड में पेसा कानून को लागू करने में देरी हुई है, जिसे हाई कोर्ट ने "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया है। सरकार की ओर से बार-बार समयसीमा का उल्लंघन हुआ है।
  3. आदिवासी समाज में मतभेद: पेसा और पी-पेसा को लेकर आदिवासी समुदाय में एकरूपता का अभाव है। कुछ संगठन पी-पेसा के पूर्ण प्रावधानों की मांग करते हैं, जबकि अन्य मौजूदा ड्राफ्ट को स्वीकार करने को तैयार हैं।
  4. जागरूकता की कमी: आदिवासी समुदायों में पेसा कानून के प्रावधानों और अधिकारों के बारे में पर्याप्त जागरूकता का अभाव है, जिसके कारण इसका प्रभावी कार्यान्वयन मुश्किल हो रहा है।
  5. केंद्र-राज्य समन्वय: केंद्र सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा लागू न करने पर वित्तीय अनुदान रोकने की चेतावनी दी है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक पूर्ण नियमावली लागू नहीं की है।
  6. कानूनी चुनौतियां: पेसा नियमावली के ड्राफ्ट पर कई याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई हैं, जो इसे लागू करने में बाधा डाल रही हैं।

समीक्षा

पेसा कानून झारखंड के आदिवासी समुदायों के लिए एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है, क्योंकि यह उन्हें स्वशासन, प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण और सांस्कृतिक संरक्षण का अधिकार देता है। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में देरी और प्रशासनिक उदासीनता ने आदिवासी समुदायों के बीच असंतोष को बढ़ाया है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बार-बार के निर्देशों के बावजूद, नियमावली को अंतिम रूप देने और लागू करने में देरी चिंताजनक है। आदिवासी बुद्धिजीवी मंच जैसे संगठनों की सक्रियता और जनहित याचिकाओं ने इस मुद्दे को जीवित रखा है, लेकिन सरकार को स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ना होगा। इसके लिए ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, जागरूकता बढ़ाने और कानूनी बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

पेसा कानून झारखंड के आदिवासी समुदायों के लिए न केवल एक कानूनी ढांचा है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को मजबूत करने का एक साधन भी है। यह कानून आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन पर अधिकार दिलाने के साथ-साथ स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देता है। हालांकि, झारखंड में इसकी धीमी प्रगति और कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियां इसकी प्रभावशीलता को सीमित कर रही हैं। सरकार को हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नियमावली को शीघ्र लागू करना चाहिए और आदिवासी समुदायों में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए। पेसा कानून का पूर्ण कार्यान्वयन न केवल आदिवासियों के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि झारखंड के समग्र विकास में भी योगदान देगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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RANEE KUMARI 

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ACHIEVEMENTS

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80% + अभ्यर्थी उत्तीर्ण- JPSC PT 2021 EXAM

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BPSC : 20% अंतिम चयन

UPSC 2O22 : 3 छात्र साक्षत्कार

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