पंचायतों में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)
संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए सतत विकास लक्ष्य 1 जनवरी, 2016 से लागू हुए। भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने सतत् विकास लक्ष्यों के लिए विषयगत दृष्टिकोण अपनाया है। यह 'वैश्विक योजना' प्राप्त करने के लिए 'स्थानीय कार्रवाई' सुनिश्चित करने वाला दृष्टिकोण है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य पीआरआई विशेषकर 17 'लक्ष्यों' को '9 विषयों' में जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में सतत् विकास लक्ष्यों को स्थानीय बनाना है। उचित नीतिगत निर्णयों और संशोधनों के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) और ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के दिशानिर्देशों में सुधार हुआ है, जो ग्राम पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण की प्रक्रिया को सुचारू बनाते हैं।
पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण करने के एजेंडे का अनुपालन करने में भारत सरकार का पंचायत राज मंत्रालय, विषयगत कार्यशालाओं/सम्मेलनों की श्रृंखलाओं का आयोजन कर रहा है, जो राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के सहयोग से पंचायती राज विभाग, राज्य ग्रामीण विकास और पंचायती राज के राज्य संस्थान, मंत्री और विभाग तथा अन्य हितधारक, निकट सहयोग से विभिन्न स्थलों पर पंचायती राज संस्थानों द्वारा आत्मसात 9 विषयों पर आधारित सतत् विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण करने के बारे में आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय सतत् विकास लक्ष्यों का प्रभावी और प्रभावशाली कार्यान्वयन तभी हो सकता है जब अवधारणा और इसकी प्रक्रिया को त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) द्वारा ठीक से समझा, अपनाया और कार्यान्वित किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि कोई भी पीछे न छूट जाए।
एलएसडीजी थीम 8 का विजन देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सुशासन एक आवश्यक घटक है। यह लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समाज में चुनिंदा समूहों के विपरीत सरकार और शासी निकायों की इस जिम्मेदारी पर केंद्रित है कि किस तरह से सत्ता वाले लोग शक्ति का उपयोग करते हैं।
सुशासन का सेवा वितरण और प्रगति से सीधा संबंध है। सुशासन के लिए टीमवर्क प्रौद्योगिकी, समयसीमा, पारदर्शिता और परिवर्तन के 5टी स्तंभ फ्रेमवर्क आवश्यक हैं। यह सभी नागरिक सेवाओं को समय पर उचित और पारदर्शी विधि से लोगों की सेवा करने की ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी पर केंद्रित है।
सुशासन वाले गांव में आवश्यक रूप से बहुत जीवंत, मजबूत और सक्रिय ग्राम सभा होनी चाहिए, जिसमें बड़ी लोकप्रिय भागीदारी, अच्छी चर्चा और समावेशी निर्णय लेने की यह परिकल्पना की गई है कि ग्राम पंचायत एक सूचना सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करती है, जिसमें सभी सूचनाओं का सक्रिय रूप से जानकारी देना और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना शामिल है।
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